top of page
खोज करे

दर्द

अपनों ने जो तोडा दिल तो पता चला, 

कि जो गैरों से मिला था वो दर्द ही न था l


ज़िन्दगी में दर्द का होना तो लाज़मी है, 

पर दर्द ऐसे भी होते हैं, ये पता न था l


हाँ मैंने भी चाहा था कुछ, 

बदले में, उनसे, कैसे बताऊँ, 

कि प्रेम के सिवा कुछ और न चाहा था l


ख़ैर बताने, जताने, समझाने के दौर हुए,अब ख़त्म l 


अपने अँधेरे और अपनी रौशनी के साथ, 

अपनी राह पर, अब अकेले हैं हम…

हाँ अपनी राह पर, अब अकेले हैं हम…


विवेक गोपाल कृष्ण पाठक


 
 
 

हाल ही के पोस्ट्स

सभी देखें
मृत्यु से संवाद

हे मृत्यु!! मैं नचिकेता सा तो नहीं, कि ढंग से पूछ सकूँ, तेरा सत्य क्या है? ऐसा भी नहीं की जग के कष्ट से मैं व्यथित नहीं, पर जब अपनों पर बीतती है, -2 क्यों सारा ज्ञान धरा रह जाता है? यदि ये मोह है तो प

 
 
 
जग जंजाल

हे प्रिय, करो कृष्ण का ध्यान, राम का गुण गान गाओ, यूँ ही इस जग जंजाल से, मुक्ति पाते जाओ l -2 एक कष्ट से निज़ात मिले तो, दूसरा आजाता है, इससे पहले ख़त्म हो दूजा, तीसरा पैदा हो जाता है l और प्रेम यदि ब

 
 
 
क्षमा और ज्ञान

क्षमा यदि शर्तों के साथ है, तो वो क्षमा कहाँ है?-2 आत्ममुग्धता और अहंकार की पराकाष्ठा है, वो क्षमा कहाँ है? ज्ञान और आत्मबोध की ओर पहला कदम, -2 माँगना त्रुटि पर क्षमा, और उसे न दोहराना है l और बिना व्

 
 
 

टिप्पणियां


bottom of page