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"Glimpses Of Truth"

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तमाशा
जलते रहें दूसरे तो, हमें उससे क्या? हमारे यहाँ तो मौसम सर्द है l -2 अपनों को न हो, तब तक दर्द कहाँ दर्द है,-2 जब तक न जलें अपने, तब तक आग कहाँ खलती है l और जब तक न पहुँचे घर तक, आग रौशनी ही लगती है l उठो बुझा दो इस आग को, अभी भी वक़्त है l-2 जिसे तुम तमाशा समझ देख रहे हो,-2 ये न हो, कि एक दिन तुम भी तमाशा बन जाओ l सुधर जाओ अंधों, अब तो सुधर जाओ l विवेक गोपाल कृष्ण पाठक

Vivek Pathak
7 जन॰1 मिनट पठन
काशी दर्शन
मैं गया शिव दर्शन को काशी, गलियों में मुझे राम मिले l-2 अनजाने से चेहरों में भी, राधा और घनश्याम मिले । देखी मूरत फिर भी प्यासा, टेका माथा फिर भी अधूरा सा l घाटों पे काटा, कर्मों को पहले-2 फिर पितरों को संतुष्ट किया l देखा उसको धैर्य में साधु के, -2 गंगा स्पर्श में महसूस किया l तब जाकर शिव को पाया, चक्षुओं में भक्तों के, तब जाकर शिव को पाया, अश्रुओं में भक्तों के l आया तो था भरा हुआ ख़ुद से, अब सब ख़ाली है, मैं नहीं हूँ, अब बस शिव हैं, मैं नहीं हूँ अब बस शिव हैं, मैं नहीं हूँ

Vivek Pathak
5 जन॰1 मिनट पठन
जोखिम
जिस राह पर चल रहा हूँ, हार जाने का जोखिम, ज़िम्मेदारियों को, न निभा पाने का जोखिम है, बर्बाद भी हो जाऊँ शायद , इस बात का जोखिम है l फिर सोचता हूँ, कि क्या ऐसा? जिस में जोखिम नहीं, हर बात मैं जोखिम है l हो सकता है ये न कर पाऊँ, हो सकता है वो न कर पाऊँ, पर जो भी कर रहा हूँ, उसमें जोखिम तो है, पर सुकून बड़ा है l जीत के भी मिले सुकून, ये तो जरूरी नहीं, जीत के भी मिले सुकून, ये तो जरूरी नहीं, जिस तरह से चल रहा है ज़माना, जीत तो मिल सकती है, सुकून नहीं l और पैसे से दुनिया है, ये सच

Vivek Pathak
7 दिस॰ 20251 मिनट पठन
पशु कौन?
वो होते हिंसक, सुरक्षा और भोजन के लिए, और हम… स्वाद के लिए, उनके शीश काटते जाते l वो होते काम-रत, ऋतु आने पर ही, और हम… सारा जीवन, काम में ही लुटाते जाते l वो जीते गोद में प्रकृति की, जीवन भर, और हम… मिट्टी, वन, नदी, वायु को मिटाते जाते l कहने को तो वो ही हैं पशु, पर हमको, मानवता का पाठ पढ़ाते जाते l कि हिरण के बच्चे को, छोड़ देती है शेरनी भी, उसका लड़कपन देखकर, और हम हैं कि अपनों को भी नहीं छोड़ते, अवसर पा,बस छलते जाते- छलते जाते l अब आप ही बताओ पशु कौन?, वो या हम? विवेक गोप

Vivek Pathak
8 नव॰ 20251 मिनट पठन
याद की जायदाद
कर-कर के देख लिया, हर क़रम,-2 कमा के देख लिया, गँवा के देख लिया, और पापों से तो सना हूँ मैं,-2 कुछ पुण्य, कमा के भी देख लिया l सब.. सब.. सब आ के चला जाता है, सब आ के चला जाता है l एक ‘उसकी याद’ है, की आके जाती नहीं l -2 और ‘उसकी याद’ में कुछ ऐसी बात है ‘विवेक’,-2 कि दौलत-शौहरत तो एक तरफ़, जश्न-ए-जन्नत और चाहत-ए-जिस्म भी फ़ीका लगता है l और कमाल तो ये है कि, जायदाद-ए -याद कभी मिटती नहीं, बाक़ी सब मिट जाता है l -2 और यही वो दौलत है, जो साथ जाती है l बस यही वो दौलत है, जो साथ जा

Vivek Pathak
31 अक्टू॰ 20251 मिनट पठन
श्मशान
कहते लोग, जिसे भयानक और अशुद्ध, जहाँ जाने के नाम से भी, हो जाती सांसें बद्ध l होते सभी बंधन जहाँ राख़, टूट जाती वृक्ष से ज्यों साख़, है यह वह स्थान, जहाँ माया भी है निषिद्ध l मरके तो सबको जाना है वहाँ, जीतेजी बिताओ कुछ पल वहाँ, तो उतरे ज्ञान विशुद्धl हो रहा जिसके दर्शन से मैं प्रबुद्ध, और हो रहा जिसके दर्शन से मैं प्रबुद्ध, हे! श्मशान, तुमसा गुरु कौन इस जग में l हे! मृत्यु, तुमसा गुरु कौन इस जग में l हे! मृत्यु, तुमसा गुरु कौन इस जग में l विवेक गोपाल कृष्ण पाठक

Vivek Pathak
21 अक्टू॰ 20251 मिनट पठन
इल्म है मुझे
ये जो लोग, रिश्ते-नातों, दौलत-ओ-शौहरत और तमाम दुनिया को, जीने का सामान समझ रहे हैं l नादान हैं, अपनी ही क़ब्र, ख़ुद खोद रहे हैं l नादान...

Vivek Pathak
13 अक्टू॰ 20251 मिनट पठन
ब्राह्मण होना
जन्मा तो हूँ श्रेष्ठ कुल में, पर मेरा श्रेष्ठ होना अभी बाक़ी है l एक-दो से तो छूटा नहीं पूरी तरह, अभी तो कई दोष मुझमें बाक़ी हैं l चलना...

Vivek Pathak
30 अग॰ 20251 मिनट पठन
रिश्ते
जो बच्चों को विदेश भेज इतराते हैं, अक्सर जीवन अकेले में बिताते पाए जाते हैं l पैसे तो हर महीने आ जाते हैं, पर होली-दिवाली पे, घर-बार सूने...

Vivek Pathak
26 अग॰ 20251 मिनट पठन
मेरी पुकार
ऐसा नहीं कि न पुकारूँ, तो आप सुनते नहीं, बिन मांगे भी दिया है, बहुत कुछ हर बारl पहले धो तो लूँ कर्मों के दाग़, एक बार, पहले लीप तो लूँ...

Vivek Pathak
16 अग॰ 20251 मिनट पठन
माँ !! तुम मुझसे क्यों लड़ती हो?
माँ !! तुम मुझसे क्यों लड़ती हो?-2 हाँ, पर गिरता हूँ तो हाथ भी पकड़ती हो l माँ !! फिर तुम मुझसे क्यों लड़ती हो? मेरे लिए एक तुम ही हो, पर...

Vivek Pathak
17 जुल॰ 20251 मिनट पठन
ख़ाली हाथ
जो अक्सर रहता नहीं, ज़माने के क़ाबिल, कर-कर के भी, मिलती नहीं जिसको मंज़िल l लोगों के बड़े काम का होता है वो शख़्स, जो ख़ुद, किसी काम का...

Vivek Pathak
5 जुल॰ 20251 मिनट पठन
कुछ ख़ास नहीं
कहने को ज़िंदगी में है बहुत, पर कुछ ख़ास नहीं, -2 जी तो रहें हैं सब, पर जीने में वो बात नहीं l यूँ तो अहसास से भरे हैं सब, -2 पर होते...

Vivek Pathak
25 जून 20251 मिनट पठन
नहीं चाहिए मोक्ष मुझे
दुःख है - धोखा है - आँसू हैं, भूख है, बीमारी है, -2 सारी दुनिया, ये सारी दुनिया, अकेलेपन की मारी है l और उसके ऊपर छाई, मतलबीपन की ख़ुमारी...

Vivek Pathak
9 जून 20251 मिनट पठन
तबाह हूँ मैं
अपनी कहानी का इकलौता गवाह हूँ मैं, सिर्फ़ मैं ही जानता हूँ, कि कितना तबाह हूँ मैं l -2 जहाँ को जीतने का फ़न, खोया मैंने, हर क़दम पे, बस...

Vivek Pathak
24 मई 20251 मिनट पठन
अपनों का ग़म
अचानक टूट के, बिलख के रो पड़ना, भरे बाज़ार में भी वीराना सा लगना l जिसके बिना अब, कोई अपना नहीं लगता, जिसके बिना हर सुख, बेमानी सा लगता l...

Vivek Pathak
16 मई 20251 मिनट पठन
जीवन और जोखिम
जिसमें नहीं ज़िगर, जो ले सके न जोखिम अगर,-2 जीना तो दूर, मरना भी हो जाता है उसका दूभर l जो सोचे कि ग़म मिलेंगें तो,-2 क्यों चला जाए उस...

Vivek Pathak
25 अप्रैल 20251 मिनट पठन
तन्हा रहना सीख लो
तन्हा रहना सीख लो, तन्हा रहना सीख लो, कि हमेशा कोई साथ न होगा l हर रिश्ता है कुछ पल का ही, हर रिश्ता है कुछ पल का हीl और अलग होने के हैं...

Vivek Pathak
18 अप्रैल 20251 मिनट पठन
गाली
जिनके कर्म गाली हैं, जिनका जीवन गाली है, जिनके कर्म गाली हैं, जिनका जीवन गाली है, और जो तहज़ीब की लाश उठाये फिरते हैं ज़ुबां पर, उनको...

Vivek Pathak
2 अप्रैल 20251 मिनट पठन
बधाई हो बेटा हुआ है
ऐ मर्द ! तेरे पैदा होने की ख़ुशी, सिर्फ़ इसलिये मनाई जाती है l-2 कि कोई तुझमें बुढ़ापे की लाठी डूँढ़ता है, या पैसे कमाने की मशीन समझता है...

Vivek Pathak
30 मार्च 20251 मिनट पठन
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