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याद की जायदाद

  • लेखक की तस्वीर: Vivek Pathak
    Vivek Pathak
  • 31 अक्टू॰ 2025
  • 1 मिनट पठन

अपडेट करने की तारीख: 3 नव॰ 2025

कर-कर के देख लिया, हर क़रम,-2

कमा के देख लिया, गँवा के देख लिया,

और पापों से तो सना हूँ मैं,-2

कुछ पुण्य, कमा के भी देख लिया l


सब.. सब.. सब आ के चला जाता है,

सब आ के चला जाता है l

एक ‘उसकी याद’ है, की आके जाती नहीं l -2


और ‘उसकी याद’ में कुछ ऐसी बात है ‘विवेक’,-2

कि दौलत-शौहरत तो एक तरफ़, जश्न-ए-जन्नत और चाहत-ए-जिस्म भी फ़ीका लगता है l

और कमाल तो ये है कि,

जायदाद-ए -याद कभी मिटती नहीं,

बाक़ी सब मिट जाता है l -2


और यही वो दौलत है, जो साथ जाती है l

बस यही वो दौलत है, जो साथ जाती है l


विवेक गोपाल कृष्ण पाठक

 
 
 

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