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बधाई हो बेटा हुआ है

ऐ मर्द ! तेरे पैदा होने की ख़ुशी,

सिर्फ़ इसलिये मनाई जाती है l-2

कि कोई तुझमें बुढ़ापे की लाठी डूँढ़ता है,

या पैसे कमाने की मशीन समझता है तुझे l


सबकी सुरक्षा का ठेका तेरा,

हर कोई चौकीदार समझता है तुझे l

तेरे संघर्षों की बात ही नहीं होती,

बाक़ी सबका दर्द देखा जाता है l


बिना मतलब के प्रेम तो,

सिर्फ़ बच्चों, स्त्रियों और कुत्तों को मिलता है l

प्रेम की अगर आशा भी की तूने,

तो उसका भी पहले मूल्य चुकाना होगा l


जीवनभर ज़िम्मेदारियों का बोझ उठाने वाला आया-2

ऐ मर्द ! बस इसलिये,

तेरे पैदा होने का जश्न मनाती है ये दुनिया l


विवेक गोपाल कृष्ण पाठक

 
 
 

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