top of page
खोज करे

अपने हिस्से के आँसू

  • लेखक की तस्वीर: Vivek Pathak
    Vivek Pathak
  • 23 अक्टू॰ 2024
  • 1 मिनट पठन

अपडेट करने की तारीख: 16 नव॰ 2024

चाहोगे जिसे हद से ज़्यादा, वही दिल तोड़ेगा,

रखी आस जिससे भी, वही हाथ छोड़ेगा l


सिर्फ़ तुम ही हो तुम्हारा सहारा,

जितना जल्दी जान लो, तो जीवन बेहतर होगा l


रो लेना, अपने हिस्से के आँसू अकेले में,

कोई साथ हो न हो,

अपनी ही राह पर अकेले चलते रहना होगा l


जिसने भी दिया आँसू, सुख का हो या दुःख का,

श्रेय सिर्फ़ तुमको जाता है,

और दोष का फल भी तुमको ही भोगना होगा l


आज जो मन में है, उसे आज ही जी लेना,

टाल, न कल पर, कल तो काल है, टाले न टलेगा l


विवेक गोपाल कृष्ण पाठक



 
 
 

हाल ही के पोस्ट्स

सभी देखें
मृत्यु से संवाद

हे मृत्यु!! मैं नचिकेता सा तो नहीं, कि ढंग से पूछ सकूँ, तेरा सत्य क्या है? ऐसा भी नहीं की जग के कष्ट से मैं व्यथित नहीं, पर जब अपनों पर बीतती है, -2 क्यों सारा ज्ञान धरा रह जाता है? यदि ये मोह है तो प

 
 
 
जग जंजाल

हे प्रिय, करो कृष्ण का ध्यान, राम का गुण गान गाओ, यूँ ही इस जग जंजाल से, मुक्ति पाते जाओ l -2 एक कष्ट से निज़ात मिले तो, दूसरा आजाता है, इससे पहले ख़त्म हो दूजा, तीसरा पैदा हो जाता है l और प्रेम यदि ब

 
 
 
क्षमा और ज्ञान

क्षमा यदि शर्तों के साथ है, तो वो क्षमा कहाँ है?-2 आत्ममुग्धता और अहंकार की पराकाष्ठा है, वो क्षमा कहाँ है? ज्ञान और आत्मबोध की ओर पहला कदम, -2 माँगना त्रुटि पर क्षमा, और उसे न दोहराना है l और बिना व्

 
 
 

टिप्पणियां


bottom of page