आँसू दवा हैं
अकेले में ही नहा गया, जो अपने अश्कों से,
अकेले में ही नहा गया, जो अपने अश्कों से l
और ख़ुद ही मिटा लिया जिसने,
आँखों से उतरती ग़मों की इन क़तारों को l
लब पे कोई शिकायत भी नहीं,
लब पे कोई शिकायत भी नहीं l
बस तेरा नाम है और जिए जा रहा हूँ,
लब पे, बस तेरा नाम है और जिए जा रहा हूँ l
विवेक गोपाल कृष्ण पाठक















टिप्पणियां