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आज ही है जीवन

31 अग॰
1 मिनट पठन

अपनी कमियों पर गाढ़ लो, यूँ नज़र,

कि रह न जाए फिर, दुनिया की भी कोई ख़बर l


तब आयेगा बदलाव, जब होगा उन पर काम,

भाड़ में जाने दो, बाक़ी बातें तमाम l


योजना सिर्फ़ आज की हो, ऊर्जा सिर्फ़ आज में लगे,

कल क्या होगा? इन व्यर्थ बातों से हमें क्या काम l


और दौड़ में अगर जीतना है, तो दौड़ना छोड़ दो,

कुछ चाहिए अगर विशेष, तो उसकी आस छोड़ दो l


बस दिशा का रखो भान, और

करने पर दो ध्यान, बस करने पर दो ध्यान l


विवेक गोपाल कृष्ण पाठक


 
 
 

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