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ईश्वर का प्रमाण

राह चलते जब, किसी की झलक आँखों में बस जाये l


यूँ ही किसी का गुनगुनाना, कानों में मिठास भर जाये l 


आँसू हो किसी की आँखों में, और दिल तुम्हारा पिघल जायेl


तुम्हारी जीत हो फिर भी किसी की हार का ग़म, 

तुम्हें नम कर जाये l


किसी के गिरने में हो, तुम्हें भी उसकी चोट का अहसास l

किसी की हंसी तुम्हारे दर्द को कम कर जाये l


न हो कुछ तुम्हारे पास देने को फिर भी, देखकर तुम्हारी आंखें माँगने वाला शुक्रिया कर जाये l


तो ज़रूरी नहीं है साहब, ये ईश्क़ ही हो, 

एक इंसान होने की निशानी भी है ये l

तुममें ईश्वर के होने का प्रमाण भी है ये l


विवेक गोपाल कृष्ण पाठक

 
 
 

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