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कहाँ हैं शिव?

कमी हो तो, पूर्ती में हैं शिव l

डर हो तो, रक्षण में हैं शिव l

दृष्टि में हैं शिव, अनुभव में हैं शिव l

होने में हैं शिव, खोने में हैं शिव l

भक्ति में हैं शिव, शक्ति में हैं शिव l

अंधकार में आदित्य हैं शिव l

अज्ञान में ज्ञान का प्रकाश हैं शिव l

अहंकार और पाखण्ड के विनाश में हैं शिव l

खुद का कमाया, सहज बाँटने में हैं शिव l

पिता के त्याग में, माँ की करुणा में हैं शिव l

एक आदर्श जीवनसाथी और पूर्ण पिता होने में हैं शिव l

दूसरों के विष को पीकर भी, अमृत बाँटने में हैं शिवl जनकल्याण का पर्याय और सृष्टि के संतुलन में हैं शिव l गुरूओं में सर्वोच्च, ईश्वर का प्रमाण हैं शिव l

करुणा के सागर, शक्ति के सर्वोच्च शिखर हैं शिव l

शक्ति के धारक, शक्ति के पूरक, सबके लिए सामान हैं शिव l


विवेक गोपाल कृष्ण पाठक


 
 
 

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तमाशा

जलते रहें दूसरे तो, हमें उससे क्या? हमारे यहाँ तो मौसम सर्द है l -2 अपनों को न हो, तब तक दर्द कहाँ दर्द है,-2 जब तक न जलें अपने, तब तक आग कहाँ खलती है l और जब तक न पहुँचे घर तक, आग रौशनी ही लगती है l

 
 
 
काशी दर्शन

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जोखिम

जिस राह पर चल रहा हूँ, हार जाने का जोखिम, ज़िम्मेदारियों को, न निभा पाने का जोखिम है, बर्बाद भी हो जाऊँ शायद , इस बात का जोखिम है l फिर सोचता हूँ, कि क्या ऐसा? जिस में जोखिम नहीं, हर बात मैं जोखिम है

 
 
 

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