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क्षमता

क्षण भर में ‘सम्पूर्ण-अर्जित’ त्यागने की क्षमता l


क्षण भर में ‘प्रियतम-प्यारे’ से विमुख होने की क्षमताl


क्षण भर में किसी ‘निरीह-पराये’ को ह्रदय से लगाने की  क्षमता l


क्षण भर में ही ‘जन कल्याण यज्ञ’ में स्वयं की आहुति देने की क्षमता l


अगर आप में है , तो आप उस ‘अवर्णीय सर्वेश्वर स्थिती’ के सबसे निकट हैं l


आपका भूत मिट चुका है, वर्तमान उद्दीप्त है और भविष्य उज्जवल l


ll शुभं भवतु ll         ll ॐ नमः शिवाय ll


विवेक गोपाल कृष्ण पाठक


 
 
 

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तमाशा

जलते रहें दूसरे तो, हमें उससे क्या? हमारे यहाँ तो मौसम सर्द है l -2 अपनों को न हो, तब तक दर्द कहाँ दर्द है,-2 जब तक न जलें अपने, तब तक आग कहाँ खलती है l और जब तक न पहुँचे घर तक, आग रौशनी ही लगती है l

 
 
 
काशी दर्शन

मैं गया शिव दर्शन को काशी, गलियों में मुझे राम मिले l-2 अनजाने से चेहरों में भी, राधा और घनश्याम मिले । देखी मूरत फिर भी प्यासा, टेका माथा फिर भी अधूरा सा l घाटों पे काटा, कर्मों को पहले-2 फिर पितरों

 
 
 
जोखिम

जिस राह पर चल रहा हूँ, हार जाने का जोखिम, ज़िम्मेदारियों को, न निभा पाने का जोखिम है, बर्बाद भी हो जाऊँ शायद , इस बात का जोखिम है l फिर सोचता हूँ, कि क्या ऐसा? जिस में जोखिम नहीं, हर बात मैं जोखिम है

 
 
 

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