top of page
खोज करे

जय श्री राम

अपडेट करने की तारीख: 16 अप्रैल 2023

पूजता हूँ मैं llरामll को -2, 

जानकी के करूणानिधान को l

हनुमत की शक्ति के प्रमाण को -2, 

शिव के अंतर्मन के गुंजायमान को l

साधुओं की साधना के आधार को,

मुनिओं के धैर्य और विश्वास को l

कष्टों के सागर में डूबते की, जीवन की आस को l


क्यों?


इसलिए नहीं कि मुझे कुछ प्राप्त हो,

इसलिए, कि llरामll के बोध रूपी अश्रु के अतिरिक्त, 

और क्या है पाने को?-2

होगी मेरी गति तो मेरे कर्मों से, यही विधि का विधान है l

बस यही एक प्रार्थना है llरामll से, कि जो भी मांगूँ प्रार्थना में, 

शब्द कुछ भी हों,  सार बस llरामll हों-2 l

ll जय श्री राम ll


विवेक गोपाल कृष्ण पाठक

 
 
 

हाल ही के पोस्ट्स

सभी देखें
मृत्यु से संवाद

हे मृत्यु!! मैं नचिकेता सा तो नहीं, कि ढंग से पूछ सकूँ, तेरा सत्य क्या है? ऐसा भी नहीं की जग के कष्ट से मैं व्यथित नहीं, पर जब अपनों पर बीतती है, -2 क्यों सारा ज्ञान धरा रह जाता है? यदि ये मोह है तो प

 
 
 
जग जंजाल

हे प्रिय, करो कृष्ण का ध्यान, राम का गुण गान गाओ, यूँ ही इस जग जंजाल से, मुक्ति पाते जाओ l -2 एक कष्ट से निज़ात मिले तो, दूसरा आजाता है, इससे पहले ख़त्म हो दूजा, तीसरा पैदा हो जाता है l और प्रेम यदि ब

 
 
 
क्षमा और ज्ञान

क्षमा यदि शर्तों के साथ है, तो वो क्षमा कहाँ है?-2 आत्ममुग्धता और अहंकार की पराकाष्ठा है, वो क्षमा कहाँ है? ज्ञान और आत्मबोध की ओर पहला कदम, -2 माँगना त्रुटि पर क्षमा, और उसे न दोहराना है l और बिना व्

 
 
 

टिप्पणियां


bottom of page