top of page
खोज करे

मूर्खता का प्रमाण

यूँ ही परेशां हूँ, कि ये न मिला वो न मिला,

पर जो मिला है उसे गिनता ही नहीं l

जब देखता हूँ ग़म दूसरों के,

तो लगते अपने ग़म कुछ भी नहीं l


भुगतता है यूँ तो, हर कोई अपने कर्मों का परिणाम,

पर जो सुख मिले हैं जीवन में,

उसे कोई गिनता ही नहीं l


दुःख में अगर आँसू और कष्ट है, -2

तो सुख में धन्यवाद क्यों नहीं l

जुटा लिया यहाँ, जितना भी समान है,

सुखी होने का ये नहीं प्रमाण है l


जो मिला, जितना मिला, जब भी मिला है,सर्वोचित है,

और अधिक के लिये प्रयास तो ठीक, होना परेशान मूर्खता का प्रमाण है l


विवेक गोपाल कृष्ण पाठक




 
 
 

हाल ही के पोस्ट्स

सभी देखें
मृत्यु से संवाद

हे मृत्यु!! मैं नचिकेता सा तो नहीं, कि ढंग से पूछ सकूँ, तेरा सत्य क्या है? ऐसा भी नहीं की जग के कष्ट से मैं व्यथित नहीं, पर जब अपनों पर बीतती है, -2 क्यों सारा ज्ञान धरा रह जाता है? यदि ये मोह है तो प

 
 
 
जग जंजाल

हे प्रिय, करो कृष्ण का ध्यान, राम का गुण गान गाओ, यूँ ही इस जग जंजाल से, मुक्ति पाते जाओ l -2 एक कष्ट से निज़ात मिले तो, दूसरा आजाता है, इससे पहले ख़त्म हो दूजा, तीसरा पैदा हो जाता है l और प्रेम यदि ब

 
 
 
क्षमा और ज्ञान

क्षमा यदि शर्तों के साथ है, तो वो क्षमा कहाँ है?-2 आत्ममुग्धता और अहंकार की पराकाष्ठा है, वो क्षमा कहाँ है? ज्ञान और आत्मबोध की ओर पहला कदम, -2 माँगना त्रुटि पर क्षमा, और उसे न दोहराना है l और बिना व्

 
 
 

टिप्पणियां


bottom of page