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तू ही है बस

  • लेखक की तस्वीर: Vivek Pathak
    Vivek Pathak
  • 3 अप्रैल 2024
  • 1 मिनट पठन

कौन देखता है दिल को? सबने दौलत देखीl-2

क़ाबलियत की बात न करें,

हर किसीने बस सहूलियत देखीl-2

और... कौन देखता है रूह को? -2

हर किसीने बस तिज़ारत देखीl

कहने को तो बहुत हैं अपने,

पर तुझसे जो मिली ऐसी न मोहब्बत देखीl-2

जो हूँ, जैसा हूँ, जिस हाल में हूँ,

तेरी रहमत में न मैंने कमी देखीl-2

बाज़ार में हो या इबादत में,

शायर में हो या कि फ़कीर मेंl

मैंने सब में बस तेरी रौशनी देखीl-2

दिन का आराम, चैन की नींद न देखी,-2

जब भी बरसा नूर, अपनी प्याली भरती देखीl-2


विवेक गोपाल कृष्ण पाठक

 
 
 

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