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खोज करे

तेरे बिना

तूने कहे सौ फ़साने ए ख़ुशनवर,

जिसने दिया दर्द ए दिल, एक नज़राना उसके लिए l


कि तुझसे बिछड़कर मरना गँवारा न हुआ,

तेरे बिना जीने को, मैंने ज़िन्दगी नाम रख दिया l

जिससे भी जुड़ा, उनमें तुझको ही खोजा,

यूँ टूटते रहने को, मैंने ज़िन्दगी नाम रख दिया l


चाहत का सागर दिल में ही रहा, बिन बरसे बादल की तरह, भटकते रहने को, मैंने ज़िन्दगी नाम रख दिया l


तुझको पाना ग़र होती मेरी मंज़िल,

तो मेरा हश्र यूँ न हुआ होता, बस चलते रहने को,

मैंने ज़िन्दगी नाम रख दिया l


तू नहीं, अब तेरा ख्वाब भी नहीं, दर्द ए दिल को जीने की वजह कर दिया, तेरे बिना जीने को,

मैंने ज़िन्दगी नाम रख दिया l


विवेक गोपाल कृष्ण पाठक


 
 
 

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