top of page
खोज करे

पिता होना क्या है?

  • लेखक की तस्वीर: Vivek Pathak
    Vivek Pathak
  • 29 अप्रैल 2023
  • 1 मिनट पठन

ख़ुश था बहुत उस ग़रीबी में भी, जब पिता का साथ था l


थीं उम्मीदें, था जूनून कुछ कर दिखाने का, 

और था साथ पिता का, इसलिए न उदास था l


मिला मुझे अपनी क़ाबलियत से बहुत अधिक,

क्योंकि पिता ने किया मेरे लिये, उनकी हैसीयत से बहुत अधिक l 


सोचता था न भूल पाऊँगा कभी वो खुशियाँ, जो उनके काँधे पर चढ़कर पाईं थीं, सब विदा हुईं जब वो मेरे काँधे पर थे l


पिता होना क्या है? वो मुझे अपने पिता से विरासत में मिला, 

और मिला नन्हासा एक पुत्र, जो पुत्र कम पिता सा अधिक मिलाl


पिता, गुरु और शिव होते प्रतीत पृथक, 

शिव सम गुरु, गुरु सम पिता, पिता सम शिव, 

न भूतो न भविष्यति ll


विवेक गोपाल कृष्ण पाठक

 
 
 

हाल ही के पोस्ट्स

सभी देखें
मृत्यु से संवाद

हे मृत्यु!! मैं नचिकेता सा तो नहीं, कि ढंग से पूछ सकूँ, तेरा सत्य क्या है? ऐसा भी नहीं की जग के कष्ट से मैं व्यथित नहीं, पर जब अपनों पर बीतती है, -2 क्यों सारा ज्ञान धरा रह जाता है? यदि ये मोह है तो प

 
 
 
जग जंजाल

हे प्रिय, करो कृष्ण का ध्यान, राम का गुण गान गाओ, यूँ ही इस जग जंजाल से, मुक्ति पाते जाओ l -2 एक कष्ट से निज़ात मिले तो, दूसरा आजाता है, इससे पहले ख़त्म हो दूजा, तीसरा पैदा हो जाता है l और प्रेम यदि ब

 
 
 
क्षमा और ज्ञान

क्षमा यदि शर्तों के साथ है, तो वो क्षमा कहाँ है?-2 आत्ममुग्धता और अहंकार की पराकाष्ठा है, वो क्षमा कहाँ है? ज्ञान और आत्मबोध की ओर पहला कदम, -2 माँगना त्रुटि पर क्षमा, और उसे न दोहराना है l और बिना व्

 
 
 

टिप्पणियां


bottom of page