top of page
खोज करे

प्रेमिका और पत्नी

  • लेखक की तस्वीर: Vivek Pathak
    Vivek Pathak
  • 3 अप्रैल 2023
  • 1 मिनट पठन

प्रेमिका

चाय बनाना आता है तुमको?

कहती हो मेरी ज़िंदगी को जन्नत बनाओगी l

बुरा वक्त आया और टाइम होगया पास,

तो ‘पापा नहीं मानेंगे’ कहती नज़र आओगी l


कहती हो मेरी ज़िंदगी को जन्नत बनाओगी l


बहाने होंगे हज़ार मुझसे दूर होने के,

पर ग़म में साथ देने की हिम्मत नहीं जुटा पाओगी l


कहती हो मेरी ज़िंदगी को जन्नत बनाओगी l


मैंने तो ख़ैर माफ़ कर दिया तुमको,

पर क्या तुम ख़ुद को माफ़ कर पाओगी ?


कहती हो मेरी ज़िंदगी को जन्नत बनाओगी l


पत्नी

चाहत की हर चीज़ मिली है मुझे, जिससे, बिन माँगे, वो तुम हो l

हर कदम पर पाया है जिसका साथ मैंने , वो तुम हो l


जिसकी थी तलाश हमेशा मुझको, वो तुम हो l

यूं तो टूट ही गया था भरम इश्क़ का लेकिन,

जो भी प्रेम में बसी है आस्था मेरी, वो तुम हो , वो तुम हो l


विवेक गोपाल कृष्ण पाठक

 
 
 

हाल ही के पोस्ट्स

सभी देखें
मृत्यु से संवाद

हे मृत्यु!! मैं नचिकेता सा तो नहीं, कि ढंग से पूछ सकूँ, तेरा सत्य क्या है? ऐसा भी नहीं की जग के कष्ट से मैं व्यथित नहीं, पर जब अपनों पर बीतती है, -2 क्यों सारा ज्ञान धरा रह जाता है? यदि ये मोह है तो प

 
 
 
जग जंजाल

हे प्रिय, करो कृष्ण का ध्यान, राम का गुण गान गाओ, यूँ ही इस जग जंजाल से, मुक्ति पाते जाओ l -2 एक कष्ट से निज़ात मिले तो, दूसरा आजाता है, इससे पहले ख़त्म हो दूजा, तीसरा पैदा हो जाता है l और प्रेम यदि ब

 
 
 
क्षमा और ज्ञान

क्षमा यदि शर्तों के साथ है, तो वो क्षमा कहाँ है?-2 आत्ममुग्धता और अहंकार की पराकाष्ठा है, वो क्षमा कहाँ है? ज्ञान और आत्मबोध की ओर पहला कदम, -2 माँगना त्रुटि पर क्षमा, और उसे न दोहराना है l और बिना व्

 
 
 

टिप्पणियां


bottom of page