top of page
खोज करे

मूल्य चुकाना होगा

अहँकार ही है, जो रोक रहा है आगे बढ़ने से l

कुछ पा लो पहले, दिखा लो पहले,

बता दो कि तुम भी कुछ हो, दुनियाँ को,

बिना कुछ पाये, कायरता होगा, छोड़ना इस जग को, बस यही कहकहकर भरमा रहा है,

अहँकार ही है, जो रोक रहा है आगे बढ़ने से,


बात अगर बस साहस की होती, तो इतनी कठिनाई न थी, भोग लो सुख साधन और, जी लो जीवन को कुछ और, बस यही कह कह कर, डोरे दाल रहा है,

अहँकार ही है, जो रोक रहा है आगे बढ़ने से l


माया का जाल और उस पर प्रारब्ध की गठरी,

बाँध रही है इस जीवन की भी ठठरी,

बढ़ना है अगर आगे तो मूल्य चुकाना होगा l

लोभ-मोह, सम्मान-अपमान, हार-जीत, पर सबसे पहले अहँकार को मिटाना होगा,

बढ़ना है अगर आगे तो मूल्य चुकाना होगा l


विवेक गोपाल कृष्ण पाठक


 
 
 

हाल ही के पोस्ट्स

सभी देखें
तमाशा

जलते रहें दूसरे तो, हमें उससे क्या? हमारे यहाँ तो मौसम सर्द है l -2 अपनों को न हो, तब तक दर्द कहाँ दर्द है,-2 जब तक न जलें अपने, तब तक आग कहाँ खलती है l और जब तक न पहुँचे घर तक, आग रौशनी ही लगती है l

 
 
 
काशी दर्शन

मैं गया शिव दर्शन को काशी, गलियों में मुझे राम मिले l-2 अनजाने से चेहरों में भी, राधा और घनश्याम मिले । देखी मूरत फिर भी प्यासा, टेका माथा फिर भी अधूरा सा l घाटों पे काटा, कर्मों को पहले-2 फिर पितरों

 
 
 
जोखिम

जिस राह पर चल रहा हूँ, हार जाने का जोखिम, ज़िम्मेदारियों को, न निभा पाने का जोखिम है, बर्बाद भी हो जाऊँ शायद , इस बात का जोखिम है l फिर सोचता हूँ, कि क्या ऐसा? जिस में जोखिम नहीं, हर बात मैं जोखिम है

 
 
 

टिप्पणियां


bottom of page