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मृत्यु और उद्देश्य


मृत्यु के दर्शन कर वापस बुलाना, तो मुझे जगाने का बस बहाना है l-2


प्रभू को कुछ और काम विशेष, मुझसे करवाना है l-2


बिना कार्य बिना कारण, कौन यहाँ एक पल भी रह सका है l-2


मतलब जीवित हो तो कोई उद्देश्य होगा l -2


ढूँढो उसे हाँ ढूँढो उसे l


अन्यथा उद्देश्य विहीन का क्या जीना है और क्या मर जाना l -2


विवेक गोपाल कृष्ण पाठक



 
 
 

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तमाशा

जलते रहें दूसरे तो, हमें उससे क्या? हमारे यहाँ तो मौसम सर्द है l -2 अपनों को न हो, तब तक दर्द कहाँ दर्द है,-2 जब तक न जलें अपने, तब तक आग कहाँ खलती है l और जब तक न पहुँचे घर तक, आग रौशनी ही लगती है l

 
 
 
काशी दर्शन

मैं गया शिव दर्शन को काशी, गलियों में मुझे राम मिले l-2 अनजाने से चेहरों में भी, राधा और घनश्याम मिले । देखी मूरत फिर भी प्यासा, टेका माथा फिर भी अधूरा सा l घाटों पे काटा, कर्मों को पहले-2 फिर पितरों

 
 
 
जोखिम

जिस राह पर चल रहा हूँ, हार जाने का जोखिम, ज़िम्मेदारियों को, न निभा पाने का जोखिम है, बर्बाद भी हो जाऊँ शायद , इस बात का जोखिम है l फिर सोचता हूँ, कि क्या ऐसा? जिस में जोखिम नहीं, हर बात मैं जोखिम है

 
 
 

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