मृत्यु का स्वीकार
- Vivek Pathak

- 15 दिस॰ 2023
- 1 मिनट पठन
मृत्यु में छिपा है, जीवन का सार l -2
व्यर्थ है जीना, बिना किये मृत्यु का स्वीकार ll -2
मित्र हो या शत्रु, अपना हो या पराया, प्रेमी हो या हो जग सारा l
ज़रूरी नहीं कि सफ़र, पूरा हो यहाँ हर किसी का l
कभी भी जाना पड़ सकता है छोड़कर, बसा-बसाया संसार सारा ll
जैसा जिया जीवन, वैसा रहेगा मृत्यु का क्षण l-2
मृत्य-क्षण की स्थिती से, निर्धारित होगी जीव की गति ll
मृत्यु की तैयारी ही, जीने की पूर्णता का है आधार l
व्यर्थ है जीना, बिना किये मृत्यु का स्वीकार ll -2
विवेक गोपाल कृष्ण पाठक














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