top of page
खोज करे

रौशनी की जाये

डूबे हो अग़र, ग़म के अधेरों में इस क़दर,

कि क़िस्मत-ए-सहर की भी, कोई अब आस नहीं,

ख़ुद को जलाकर, क्यों न रौशनी की जायेl


जो अभी थके नहीं, जिनमें बाकी है आस,

क्यों न, उनकी राहों को रौशन किया जाये,

हारी हुई ज़िंदगी को भी, कुछ मक़सद दिया जाये,

ख़ुद को जलाकर क्यों न, रौशनी की जायेl


टूटे हुए मकां के पत्थरों से क्यों न,

किसी नए घर की नींव भरी जाये l

सूखे हुए दरख्तों से क्यों न, चूल्हे रौशन किये जाएँ l


अरे मुर्दा क्या करेगा कफ़न का,

जो ज़िंदा है, उसका तन ढँका जाये l


हारी हुई ज़िंदगी को भी, कुछ मक़सद दिया जाये,

ख़ुद को जलाकर क्यों न, रौशनी की जायेl


विवेक गोपाल कृष्ण पाठक


 
 
 

हाल ही के पोस्ट्स

सभी देखें
मृत्यु से संवाद

हे मृत्यु!! मैं नचिकेता सा तो नहीं, कि ढंग से पूछ सकूँ, तेरा सत्य क्या है? ऐसा भी नहीं की जग के कष्ट से मैं व्यथित नहीं, पर जब अपनों पर बीतती है, -2 क्यों सारा ज्ञान धरा रह जाता है? यदि ये मोह है तो प

 
 
 
जग जंजाल

हे प्रिय, करो कृष्ण का ध्यान, राम का गुण गान गाओ, यूँ ही इस जग जंजाल से, मुक्ति पाते जाओ l -2 एक कष्ट से निज़ात मिले तो, दूसरा आजाता है, इससे पहले ख़त्म हो दूजा, तीसरा पैदा हो जाता है l और प्रेम यदि ब

 
 
 
क्षमा और ज्ञान

क्षमा यदि शर्तों के साथ है, तो वो क्षमा कहाँ है?-2 आत्ममुग्धता और अहंकार की पराकाष्ठा है, वो क्षमा कहाँ है? ज्ञान और आत्मबोध की ओर पहला कदम, -2 माँगना त्रुटि पर क्षमा, और उसे न दोहराना है l और बिना व्

 
 
 

टिप्पणियां


bottom of page