top of page
खोज करे

शहीद की कहानी

  • लेखक की तस्वीर: Vivek Pathak
    Vivek Pathak
  • 5 अप्रैल 2024
  • 1 मिनट पठन

एक छोटीसी कहानी है, जो मुझे, आपको सुनानी है...

माँ बोली.. जब तू मेरी कोख में था... मेरी ख़ुशी का ठिकना न थाl वैसे तो मैंने तुझे जन्म दिया..पर जब तू मेरी गोद में आया, तब ही पहली बार, मैंने अपने अंदर की माँ को पहचाना था l पिता बोलेl आज से पहले मैं पुत्र, पति और भाई थाl तू आया मैं पिता हुआl क्या बताऊँ? क्या मुझमें पूरा हुआ? जो न जाने कब से अधूरा थाl ये क्या हुआ अचानक...सब टूट गया..सब छूट गयाl तुझे यूँ न तिरंगे में लिपट के आना थाl अभी तो कुछ साल ही बीते थे.. हमें तो तेरे साथ अपना बुढ़ापा भी जीना थाl गर्व है हमें कि चुका दिया मातृ भूमि का कर्ज़ तूनेlपर हमारी आस को तोड़कर,तुझे यूं न जाना थाl न जाने कितनी माओं ने, अपनी आस को खोयाl न जाने कितने पिताओं ने, अपने काँधे पर जवान पुत्र की लाश को ढोयाl न जाने कितनी ही दुल्हनों ने, अपने सुहाग को खोया हैl

"तब जाके कहीं हमनें जीने की आज़ादी को पाया है l"

#Respect Sacrifice #Respect Marters

#Respect Soldier #Jai Hind

विवेक गोपाल कृष्ण पाठक

 
 
 

हाल ही के पोस्ट्स

सभी देखें
तमाशा

जलते रहें दूसरे तो, हमें उससे क्या? हमारे यहाँ तो मौसम सर्द है l -2 अपनों को न हो, तब तक दर्द कहाँ दर्द है,-2 जब तक न जलें अपने, तब तक आग कहाँ खलती है l और जब तक न पहुँचे घर तक, आग रौशनी ही लगती है l

 
 
 
काशी दर्शन

मैं गया शिव दर्शन को काशी, गलियों में मुझे राम मिले l-2 अनजाने से चेहरों में भी, राधा और घनश्याम मिले । देखी मूरत फिर भी प्यासा, टेका माथा फिर भी अधूरा सा l घाटों पे काटा, कर्मों को पहले-2 फिर पितरों

 
 
 
जोखिम

जिस राह पर चल रहा हूँ, हार जाने का जोखिम, ज़िम्मेदारियों को, न निभा पाने का जोखिम है, बर्बाद भी हो जाऊँ शायद , इस बात का जोखिम है l फिर सोचता हूँ, कि क्या ऐसा? जिस में जोखिम नहीं, हर बात मैं जोखिम है

 
 
 

टिप्पणियां


bottom of page