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शायर होना क्या है?

आख़िर शायर होना क्या होता है?-2


शायर होना, एक रफ़ कॉपी की तरह होता है,

कि जब तक न काटे, अपने लिखे को दो बार,

सही लिखना कहाँ होता है?


यूँ ही कोई शायर नहीं होता है, कि ख़ुद पे रोना, ख़ुद पे हँसना और बस आगे बढ़ते रहना होता है l -2


कि ख़ुद से रूबरू हो, ख़ुद को ही पढ़ना होता है,

यूँ ही कोई शायर नहीं होता है l -2


भीतर ठहराव और बाहर चलते रहना होता है-2

मेरी समझ में बस यही शायर होना होता है l-2


विवेक गोपाल कृष्ण पाठक





 
 
 

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