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श्री राम गीत

  • लेखक की तस्वीर: Vivek Pathak
    Vivek Pathak
  • 29 अक्टू॰ 2023
  • 1 मिनट पठन

l जय जय जय श्री राम l जय जय जय श्री राम l

जानकी के करुणानिधान, जानकी के करुणानिधान

l जय जय जय श्री राम l जय जय जय श्री राम l

हनुमत के शक्ति प्रमाण l हनुमत के शक्ति प्रमाण

l जय जय जय श्री राम l जय जय जय श्री राम l

शंकर के अंतर्मन के गुंजायमान, शंकर के अंतर्मन के गुंजायमान l

l जय जय जय श्री राम l जय जय जय श्री राम l

शरणागत के कृपानिधान l शरणागत के कृपानिधान

l जय जय जय श्री राम l जय जय जय श्री राम l

ऋषियों ने तप का आधार मान, पाया प्रकृति का सम्पूर्ण ज्ञान l

l जय जय जय श्री राम l जय जय जय श्री राम l

सक्षम की क्षमता, अक्षम का मान l

सक्षम की क्षमता, अक्षम का मान l

l जय जय जय श्री राम l जय जय जय श्री राम l

जानकी के करुणानिधान l हनुमत के शक्ति प्रमाण l

l जय जय जय श्री राम l जय जय जय श्री राम l


विवेक गोपाल कृष्ण पाठक

 
 
 

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तमाशा

जलते रहें दूसरे तो, हमें उससे क्या? हमारे यहाँ तो मौसम सर्द है l -2 अपनों को न हो, तब तक दर्द कहाँ दर्द है,-2 जब तक न जलें अपने, तब तक आग कहाँ खलती है l और जब तक न पहुँचे घर तक, आग रौशनी ही लगती है l

 
 
 
काशी दर्शन

मैं गया शिव दर्शन को काशी, गलियों में मुझे राम मिले l-2 अनजाने से चेहरों में भी, राधा और घनश्याम मिले । देखी मूरत फिर भी प्यासा, टेका माथा फिर भी अधूरा सा l घाटों पे काटा, कर्मों को पहले-2 फिर पितरों

 
 
 
जोखिम

जिस राह पर चल रहा हूँ, हार जाने का जोखिम, ज़िम्मेदारियों को, न निभा पाने का जोखिम है, बर्बाद भी हो जाऊँ शायद , इस बात का जोखिम है l फिर सोचता हूँ, कि क्या ऐसा? जिस में जोखिम नहीं, हर बात मैं जोखिम है

 
 
 

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