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समझदारी

7 मार्च
1 मिनट पठन

माया के चक्करों में पड़े रहना बेक़ारी है l


व्यक्ति हो या परिस्थिति, अंधे होकर जुड़े रहना, अंतहीन लाचारी है l -2


और तुम्हारे होते ‘उसको’ समझना कठिन है l -2


ख़ुद को मिटा उसमें मिला,

‘समर्पण’ में ही समझदारी है l -2


विवेक गोपाल कृष्ण पाठक




 
 
 

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वहम

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ख़्वाब हो या मकान, ख़्वाब हो या मकान, जब तक दूसरे का ना जले, कहाँ फ़र्क़ पड़ता है l दूसरों के जनाज़ों में, मैंने लोगों को कहते सुना है, कितनी देर और लगेगी, कितनी देर और लगेगी, घर पर खाना बना है l और व

 
 
 

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