समझदारी
- Vivek Pathak

- 7 मार्च
- 1 मिनट पठन
माया के चक्करों में पड़े रहना बेक़ारी है l
व्यक्ति हो या परिस्थिति, अंधे होकर जुड़े रहना, अंतहीन लाचारी है l -2
और तुम्हारे होते ‘उसको’ समझना कठिन है l -2
ख़ुद को मिटा उसमें मिला,
‘समर्पण’ में ही समझदारी है l -2
विवेक गोपाल कृष्ण पाठक














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