स्वयं के सत्य का अनुभव
- Vivek Pathak

- 21 अग॰ 2022
- 1 मिनट पठन
अपडेट करने की तारीख: 31 अग॰ 2022
बहुत कष्ट हैं इस दुनियाँ में,
किसी के पास कम या ज्यादा नहीं,
हर एक के पास है अपना अपना,
देखो जब भी मजबूर या लाचार को,
बाँट लो जो भी बाँट सकते हो,
की उसका, तुममें, होने का तुम्हें अहसास होl
विवेक गोपाल कृष्ण पाठक














टिप्पणियां