top of page
खोज करे

स्वयं के सत्य का अनुभव

अपडेट करने की तारीख: 31 अग॰ 2022

बहुत कष्ट हैं इस दुनियाँ में,

किसी के पास कम या ज्यादा नहीं,

हर एक के पास है अपना अपना,

देखो जब भी मजबूर या लाचार को,

बाँट लो जो भी बाँट सकते हो,

की उसका, तुममें, होने का तुम्हें अहसास होl



विवेक गोपाल कृष्ण पाठक

हाल ही के पोस्ट्स

सभी देखें
अपेक्षा की व्यर्थता

व्यर्थ अपेक्षा, प्रेम के बदले प्रेम की, व्यर्थ अपेक्षा, वात्सल्य के बदले समर्पण की, व्यर्थ अपेक्षा, त्याग के बदले प्राप्ति की, व्यर्थ...

 
 
 
फंसे रहना कब तक

फंसे रहना कब तक खुशी के कुछ पलों की दौड़ में, दूसरोँ से आगे बढ़ जाने की होड़ में, ख़ुद को साबित करने के जोड़ में, फंसे रहना कब तक अपनों से छूट...

 
 
 
सुकून-ए-मौत

कष्टों को अधिक कहना तो बेमानी है, कैसा भी हो कुछ देर में सहने की शक्ति तो आनी है। -2 कर कर के देख लिया "मैं" ने बहुत कुछ, करना तो अब भी...

 
 
 

टिप्पणियां


bottom of page